
it is well said ki"khalli dimag shaitan ka ghar"but sometime yahi shitani kuch aaise khurafato ko janm de deti hai jinka koi jawab nahi hota...fursat k unhi lamho me kuch khurafato ka pratiphal hai "fursatnama"...
Sunday, January 29, 2012
ये "मौसम" का "जादू" है "मितवा".....

Sunday, January 22, 2012
.ये "गणतंत्र" है भाई साब....
अच्छा भाई साब,"आम हिन्दुस्तानी" से बेहतर "पार्टी से निकाला गया "विधायक" ! यू नो "अगले" की "आत्मा" कभी भी "डाईव" मारकर "पार्टी" तो बदल सकती है मगर "अपन" तो ना "सुहागिन" में और ना "विधवा" में ! "सरकार" "किसी" की भी बने,अपने "हिस्से" में तो वही "मनहूसियत" ही आनी है ! मगर वो कहते है ना कि "मजबूरी" का नाम "मनमोहन" तो "हताशा" का नाम "हजारे" ! कमबख्त अपने ही "वादे" पर "टिका" रहना "मुश्किल"....."अगले" को पता है कि जिस "मुल्क" में लोग "पत्थर" बनने के "डर" से सारी "रात" जाग सकते है,वहां "हाथियों" को "ढँक" देने से "कुछ" नहीं होने वाला ! "देशभक्ति" के गानों पर "डांस" करते हुए ,"तिरंगा" लहराने वाले भी "अपने" बीच पाकर "मुह" पर "स्याही" फेंक सकते है ! "मौसम" और "महबूब" का "पारा" कभी भी "बदल" सकता है ! कसम "बाबूराम कुशवाहा" की, "आप" ही बताओ किसे "जिताओगे" और किसे "हराओगे" ! यहाँ तो हर "जलेबी" "चाशनी" में "डूबी" है ! वैसे भी इस "मुल्क" में "मौलिक प्रतिभा" की कोई "कदर" नहीं है ! अभी "खबर" पढ़ी कि "एम्स" का परचा "लीक" करके "डॉक्टर" बनाने का "स्वरोजगार" कुछ "नौजवानों" ने शुरू किया था ! "धंधा" भी "बच्चों" का "ठीक-ठाक" चल रहा था,मगर शायद "पुलिसजी" से "इत्यादि-इत्यादि" "वगैरह-वगैरह" तय नहीं था, सभी को "धर" लिया गया ! इस "घटना" से मुझे गहरा "आघात" लगा है ! जी तो करता है कि "तिलमिलाकर" मै भी "ख़त" लिख दूँ! मगर तभी "दिल" से "आवाज़" आई,जाने दो "डी.डी." अपना मुल्क "अतिरेक" में जीता है ! हम सब "भावनात्मक" लोग है ! देखा नहीं इस बार फिर "चुनावो" में "भय-भूख-भ्रष्टाचार" मिटाने के "वादे" है ! "रोटी-साईकिल-आकाश-लैपटॉप" से लेकर "स्वच्छ प्रशासन" देने के वायदे है और हाँ इस बार तो "इंडिया अगेंस्ट करप्शन" भी है....सो "बेवजह" तू "पंगा" ना ले वर्ना "चुनाव आयोग" कि "सख्ती" के नाम पर "चौराहे" पर "पुलिसजी" तेरी "जेब" का "पर्स" जब्त करके "नोटिस" भिजवा देंगे "मनहूस आम हिन्दुस्तानी तेरी जेब....और उसमे पैसे"....!!!! ये "गणतंत्र" है भाई साब, यहाँ सबको "आज़ादी" है ! "आप" भी अपने "तरीके" से "इंजॉय" करो..... बकौल "अशोक चक्रधर" "जहाँ पब्लिक के द्वारा,पब्लिक के लिए,पब्लिक कि ऐसी तैसी होती है,वही सच्ची डेमोक्रेसी होती है !!!!! बधाइयाँ !!!!!!
Monday, January 2, 2012
......आप उन्हें परियों के ख्वाब दिखाते रहिये

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