Sunday, May 15, 2011

...आदमी टूटा हुआ ख्वाब है फरिश्तों का

अच्छा सच में भाई साब,"कुछ" लोगों की "आदत" ही होती है "रुदाली" होने की ! उनको "ऐशवर्या" को देखकर "अभिषेक" नहीं,"सलमान-विवेक" याद आते है ! पुरानी कहावत है की "शादी" में कितनी भी "बेहतरीन" विदाई क्यों ना कर दो,"फूफा" का "मुंह" "टेढ़ा" ही रहेगा ! आपको तो बस "वजह" चाहिए "स्यापा" करने की लिए ! "पाँच रुपये"  पेट्रोल के बढ़ गए तो इतनी हाय तोबा ? "क़र्ज़" लेकर "कार" खरीदी उसका  "ज़िक्र" तक नहीं ! ये तो वही "बात" हुयी की जब तक "पार्टी" में रहे तब तक "नेताजी",पार्टी से "बाहर" हुए तो "डान" !ये अपने मुल्क की "डेमोक्रेसी" है भाई साब ! "चुनावों" में "अम्मा" "दीदी" एक कर देने से "जनता" की "तकदीर" नहीं बदलती है ! सब एक जैसे है........"माकपा" "भाकपा".....!! (डोंट टेक अदरवाइज़,ये हमारी "राजनीतिक पार्टियों" के "नाम" है, सिर्फ "साउंड" से "फील" थोडा "अनकमफर्ट" देते है ,...झामो,वामो....झामुमो.....)
 एनी वे हम "फरमा" रहे थे की "भटठा-परसौल" में "राजनीतिक युवराज" के  "धरना" देने से सिर्फ "सुर्खिया" मिलती है "समाधान" नहीं !जिस मुल्क के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक-और बच्चे "पढने"  "पढ़ाने"  नहीं "मिड-डे मील"खाने जाते हो  वहां "एन.डी" का "डी.एन.ए." करा लेने से क्या "हासिल" होगा ! देखा नहीं "उद्योग नगरी" पटरी से उतर गयी है ! "उच्चतम न्यायलय" को "न्याय" से ज्यादा "निर्देश" देने पड़ रहे है ! "ओरेंज कैप" किसको मिली ये सबको पता है मगर "राष्ट्रीय खेल" के "कप्तान" का "नाम" कितनो को "पता" है ?....लो मै भी न आपके साथ "स्यापा" करने लगा ...छोड़ो जी, "जिंदगी" बेहद "खूबसूरत" है..इसी लिए "अम्मा" को "चाय" पे बुलाया है ! "दीदी"ने रंग जमाया है ! "कर्नाटक" में "नाटक" जारी है.....कुल मिला कर यहाँ "अक्षय कुमार" की "कामेडी" "हिट" है, "महा अक्षय" बनकर "हारर" करने की कोशिश "सुपर फ्लॉप" है ! "आमिर" को नई "आईटम गर्ल" की तलाश है ! आप भी बेवजह "इलेक्ट्रोनिक चैनलों" और "राजनीतिज्ञों" के बहकावे में मत आइये ...भरोसा रखिये कल को "पेट्रोल" के लिए भी "क़र्ज़" मिलने लगेगा ! बैंक है न ! एक "किश्त" और सही....वैसे भी आम आदमी की "जिंदगी" में सिर्फ "किश्ते" ही तो है जो उसके "ख्वाबों" को "जिंदा" रखे है और इसी "उम्मीद" में "आम आदमी"  "किश्तों" में "जीता" चला जा रहा है की उसके "सपने" भी "सच" होंगे एक दिन.....बकौल नीरज साब....." क़र्ज़ रो रो के भरा,उम्र की सब किश्तों का, और सम्मान किया वक़्त के सब रिश्तों का ! फिर भी कुछ कमी है मुझमे तो माफ़ कर दो, आदमी टूटा हुआ ख्वाब है फरिश्तों का !!!!     

Sunday, May 8, 2011

......अरे हाँ, आज तो "मदर्स डे" है !

कोई कुछ भी कहे, पर आप यकीन  मानिये भाई साब,पूरी दुनिया में हमारी "इंटेलिजेंस" का  कोई मुकाबला  नहीं है !अब ये अलग बात है की हम दिखावे में "बिलीव" नहीं करते है इस लिए "अक्सर" हमारा सारा "टेलेंट" धरा का धरा रह जाता है ! सुना नहीं आपने अपने थल सेनाध्यक्ष का बयान "ऐसी  कार्यवाही करने में हम भी सक्षम है"! क्यों आ गया न आपको यकीन!कसम "चुलबुल पाण्डेय" की "एबटाबाद" में जितनी गोली "कमांडोज"ने नहीं चलाई होगी उससे "ज्यादा" तो हमने "लादेन" "कसाब" पर तडातड "एस.एम.एस." फारवर्ड कर डाले है ! है कोई "मुकाबला" हमारी "इंटेलिजेंस" का ? हाँ ,ये अलग बात है की ये सुन कर "मनवा" में हूक सी उठती है कि "अगले" कि "हवेली" में "गेंद" चली जाये तो "गेंद" के बदले "सौ" "पचास" का "नोट" दे देता था ! कसम "मनरेगा" की,वक़्त रहते पता चल जाता तो "दो-चार" हज़ार हम भी "झटक" लाते मगर वाह री  किस्मत,"पुणे वारीअर" बनना भी "बंगाल टाइगर" की ही "किस्मत "में लिखा होता है !यहाँ तो आप अपनी "अधिग्रहीत ज़मीन" का "मुआवजा" भी मांगोगे तो पुलिस की "गोली" मिलेगी...... बहरहाल आप हमारे "ना" "पाक" इरादों  को छोडिये आपने देखा नहीं "पाक" को ही नहीं पता था की "अगला "उनकी "मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप" के साये में रह रहा था....! ओये होए...इसे कहते है "मासूमियत" "भोलापन" फ़िल्मी स्टाइल  में कहें  तो "तुम्हारी अदाओं पे मै वारी-वारी" ! उस पर "तुर्रा"  ये की "कोई और जुर्रत ना करे" ! वह मियां, खूब कही "उनका" इश्क इश्क, "हमारा" इश्क.....!एनी वे,वो कहते है ना की सिर्फ "स्कर्ट" पहना देने से "बैडमिंटन"का स्तर नहीं "सुधर"  जायेगा !कुछ नियम कायदे भी होते होते!अरे हमारे "मुल्क"  की तो "बात" ही निराली है ! यहाँ "इंजीनियरिंग" का "परचा" भी "लीक" होता है और "इंजीनियर"  की "हत्या" में "उम्र कैद" भी ......अरे हाँ, आज तो "मदर्स  डे" है !"टी.वी.स्क्रीन" से लेकर "फेसबुक" के "स्टेट्स"  तक "माँ" के लिए भावनात्मक लाइने,विचार,और जज्बात  "छलक" रहे है ये और बात है की इसी "मुल्क" में हर साल  "एक लाख" महिलाएं "माँ" बनने के दौरान "दम" तोड़ देती है ! अपनी "संस्कृति" में गाय,नदी ,धरती तक को "माँ" मानने वाली  "परम्परा" तो कब का "दम" तोड़  ही चुकी है ! आज के दौर में  तो "माँ" के "नाम" पर "सभी" को "मुनव्वर राना" के "शेर" ही "याद" आते है ! और सच में "माँ" की याद.....वो तो सिर्फ "दुआओं" की "ज़रूरत" के "वक़्त" ही आती है.....!!!! फुर्सत में हूँ इस लिए शेर अर्ज करता हूँ...."एडियों के जर्ब से नदी खारी हो गयी,सर्दियों की रात  बेवा पर भारी हो गई! की थी जिसने परवरिश,गैरों के बर्तन मांझ  कर,वो बुढिया कई बेटों पर भारी हो गई......!!"  "हैप्पी मदर्स डे" !!!    

Sunday, May 1, 2011

...हम करें तो करेक्टर ढीला है!!!


अच्छा भाई साब,सच-सच बताइयेगा ढाई अरब लोगों ने "शाही शादी" का "नज़ारा" देखा या या फिर "वो" देखा जो "बकिंघम पैलेस" की "बालकनी" में दिखा...वो तो कहिये गलतियाँ रिपीट  करने में अपना कभी विश्वास नहीं रहा,दूसरे "वो' कभी तैयार नहीं होगी वर्ना घर की बालकनी पर खड़े होकर ऐसा ही कुछ "शाही कारनामा" करने का अपना भी इरादा था ! यू नो,रातों रात "पापुलर" होने का इससे बेहतर "मौका" अपने को दुबारा नहीं मिलेगा....अब "आप" ही बताइए वो "कौन" है जो "पापुलर"नहीं होना चाहता? "शाही शादी" को देख कर ही ये "ख्याल" आया की "घोटालों" पर तो "क्रीमीलेयर"... बोले तो "कार्पोरेट सेक्टर" की "मोनोपली" है ! उसके बारे में "आम आदमी" "सपना" भी नहीं देख सकता है! हाँ ,वो "शाही स्टाइल" ज़रूर adopt कर सकता है!मुल्क गवाह है की पहले भी "मीका पाजी" से लेकर "रिचर्ड गेर -शिल्पा" "मंडेला-शबाना" "चार्ल्स-पद्मिनी"....एक लम्बी "पापुलर" फेहरिस्त है ...! अब आप ठहरे "सिविल सोसाईटी"  के "प्राउड"  मेम्बर तो पूछोगे..इससे क्या आपकी भी  "रिसेप्सन पार्टी" सुबह तक चलेगी?और हम ठहरे "आदर्श  सोसाईटी" के "मेंबर" सो फ़ौरन तड़प कर मत चूको "चौहान" की तर्ज़ पर कहेंगे ,क्यों नहीं चलेगी? जब "विश्व कप" जीतने पर कपडे उतरने का ऐलान करने वाली को "खतरों के खिलाडी-४" में चुन लिया जाता है तो फिर "बिग-बॉस" के  अगले  सीजन के लिए "हम" क्या  "बुरे" है और हाँ "सम्भावना"है की कल "एस.एम.एस."करके "आप" ही हमें जिताओ...मगर वो कहते है ना की "आज" के दौर में "लक्ष्मण" जैसा "देवर" हो तो "भाभी" भी बुरा मान  जाती है ! यहाँ  तो "मौत" से पहले "ताबूत" का "आर्डर" दे दिया जाता है ! संत की "परम्परा" नहीं "सम्पति"पर "नज़र" रहती है !बकौल आदरणीय सलमान खान " हम करें तो करेक्टर ढीला  है ! सुना नहीं,रेलवे ने कहा है की "खिलाडी" को "धक्का" नहीं दिया गया उसने खुद ही  "आत्महत्या" की कोशिश की थी ! "बडबोले योग-गुरु" के खिलाफ  इस बार "संतों" ने "हल्ला" बोला है ! "जिंदगी"  और "आई.पी.एल." में ज्यादा "फर्क" नहीं है !"ओरेंज  कैप" हमेशा  "सर" बदलती रहती है ! पुणे के "कलमाड़ी" पर "अरबो"के "घोटाले" का "आरोप" है और वही उनके पडोसी "अहमदनगर"के "अन्ना" भ्रष्टाचार के विरुद्ध "आवाज़" है....! "तपती" गर्मी में सडको पर "तारकोल" डालता "मजदूर" हो या फिर "गरीबी"से तंग आकर " खुदकशी" करता "किसान"..."भ्रस्टाचार" और "आवाज़" से बढ़कर उसके लिए इस "महंगाई" में "बच्चो" के लिए दो जून की "रोटी" और दो गज "कपडा" ही "शाही जिंदगी" है,उसे किसी से कोई "शिकवा" नहीं है ! ये हमारा "मुल्क" है भाई साब....कहाँ  तो तय था चरागाँ हरेक घर के लिए! कहाँ चिराग मयस्सर नहीं, शहर के लिए !! ना हो कमीज़ तो पावों से पेट ढँक लेंगे,ये लोग कितने मुनासिब है इस सफ़र के लिए !!!! "श्रमिक दिवस" पर मेहनतकश "मजदूरों" को "सलाम"...अब तो इनके "हिस्से" में यही "बचा" है....             

Sunday, April 24, 2011

.द होल थिंग इज़ दैट के भैया.....

वो क्या है भाई साब,आज सुबह से ही  बड़े "मूड" में हूँ,सोचता हूँ की "अपनी" भी एक "सी.डी".बनवा लूँ ! क्या  पता, कब  जारी  करनी पड़ जाये !ऊप्प्स.......इस से पहले की "आप" भी "एकता कपूर" की तरह "सी.डी." पर "फिल्म" बनाने का "एलान" कर दो, मै "क्लिअर" कर दूँ अपना इरादा "बात-चीत"वाली "सी.डी"का है...एनी वे,अब आप पूछोगे एक ही क्यों?कसम "फोरेंसिक लैब"की इस "मुल्क" में "एक" का "पांच" बनते देर नहीं लगेगी...! आपको तो पता ही है "अमरवाणी"और मौसम की "गर्मी" का कोई "अंत" नहीं है ! माथा चकरा जाता है! सुना नहीं,इधर "खबर" आई की अपने "प्रदेश" में "पुलिस जी"अब "जनता" से "सभ्यता" से पेश आयेंगे,उधर  फ़ौरन "आत्मा" ने "डाईव" मारी और तड से "हलफनामा" दे दिया "गुस्सा" उतारने की "छूट" देने को कहा था ! इसे कहते है "डांस इंडिया डांस" की "भाषा" में "पॉपिंग & लाकिंग"! पुरानी कहावत है "गड्ढे"  में गिरा हर बच्चा "प्रिंस"नहीं होता है कुछ "टी.वी.शो" में जाकर अपने ही "गुरु" को "आँख" दिखाते है! अब आप कहा करो "गाँधी"साहित्य रखने से कोई "गाँधीवादी"नहीं हो जाता है मगर "ड्राफ्टिंग कमेटी" में एक "दलित" भी होना चाहिए!  भाई साब "अन्ना" पर "ताना" मारना "लेटेस्ट फैशन" है! देखा नहीं "कटे पैर"में भले "संक्रमण" फैलता जाये मगर "राजनीति" "बरेली"से "लखनऊ"और फिर "लखनऊ" से "एम्स" अपना "ऐम" साधने के चक्कर में "ट्रांसफर" कराती रहेगी! अच्छा अब "आप" ही बताइए "मुल्क" बड़ा या "आई.पी.एल."? कसम से इसका "जवाब" आपको  किसी भी "मस्तिष्क"के "डिजिटल" नक़्शे में नहीं मिलेगा ! आप "मलिंगा" को वापस बुलाओगे,अगला "टेस्ट क्रिकेट"से "संन्यास"का एलान कर देगा...! सबक ले लो आप भी "वेस्टइंडीज" के दौरे पर "आराम" दे ही दो,बेवजह इस "पचड़े" में मत पड़ो की "मुल्क" बड़ा या "आई.पी.एल."! हाँ, अगर आपको "शांति" या "संतोष"की तलाश है तो "हे-गड़े"मुर्दे उखाड़ने वालो, अगले महीने "योग गुरु"के "अनशन" का "एलान" है ! आप उधर "ध्यान" दो "एक-आध" "उधर" भी मिल जायेंगे ! ये वो "मुल्क" है जहाँ "मुनाफ" भी "बैटिंग" करने बाकायदा "सन-स्क्रीन" क्रीम लगा कर जाता है....! बकौल मरहूम "महमूद साब"...द होल थिंग इज़ भैया......! आप "आम जनता" हो ! सब "समझ" गए ना,कि क्यों "मोर" "नाचते" हुए भी "रोता" है और "हंस"मरते हुए भी "गाता"है ! यही "जिंदगी" का "फंडा" है भाई साब! "दुखों' वाली "रात" "नींद" नहीं आती, और"ख़ुशी" वाली "रात" कौन "सोता" है.....!! ये अपना अपना "सोचने" का "नजरिया" है वर्ना यहाँ कौन "पाता" है और कौन "खोता" है  !!! जो नहीं मिला उसे "भूल" जाओ, जो "मिल" गया उसे "एन्जॉय" करो....अभी चलते है ,फिर मिलते है "फुर्सत" से,तब तक मेरे साथ-साथ "आप" भी गुनगुनाइए...... द होल थिंग इज़ दैट के  भैया..... !!!!!!!!!!        

Sunday, April 17, 2011

.....परकटे परिंदे कि कोशिश तो देखिये !!!!

कसम "जन लोकपाल विधेयक" की भाई साब,"पहली बैठक से दोनों पक्ष खुश" ये खबर पढ़ कर "मनवा" एकदम से "चिअरलीडर" हो गया ! जी किया की "स्टेडियम" में रह रह कर बजते "ट्रक" के "हार्न" की "धुन" पर "बेवजह" का "कोलाहल"मचाने लगूँ ! पहली बार "सिविल सोसायटी" का मेंबर होने की "ठसक" "ओवर फ्लो" होने ही वाली थी की "खबर" आ गयी  फलां-फलां "राज्य सरकार" ने "विश्व कप" जीतने वाली टीम को जो इनाम दिया है  वो "राज्य"के "शिक्षा बज़ट" का है !आपकी कसम भाई साब, आत्मा तड़प के फ़ौरन "पीपली लाइव" हो गयी ! आवाज़ आई, अरे मनहूसो !कभी "मैच" के दौरान देखा है "स्कूल-कालेजों" में जाकर! भाई लोग "पीरियड" गोल करके "मैच" देखते है और "आप" है की....! वैसे भी जिन्होंने "शिक्षा" पा ली है "वो" कौन से "रोज़गार"पर लग गए है! "गुटके"और "तम्बाकू" पर "पाबन्दी" लगाने से "बिक्री" कम नहीं हो जाती है !"बाबुओं" और "अफसरों"के बीच "बँटने"से से बेहतर है "ईनाम" में "बँट" गया !सुना नहीं "उत्तर प्रदेश" सरकार ने "उच्चतम न्यायलय" में अपील कर दी है की ९० दिनों के भीतर "भ्रष्टों" पर "केस" चलाने की "मंज़ूरी"नहीं दी जा सकती है ! क्योंकि "कानून"में कोई "समय-सीमा" नहीं है! सही है "कानून" कानून" है ! "सचिन" को "भारत रत्न"देने का कानून नहीं है उधर "सिविल सोसायटी" का "अध्यक्ष" बनते ही कम "स्टाम्प" अदा करने की "नोटिस" जारी हो गयी ! वो कहते है ना की "सुपरबग" हर जगह है,बस "डरने" की "ज़रूरत" नहीं है ! कोई "जंतर-मंतर" पर हुए "खर्च" के "जांच" की "मांग' करके "खुश" हो जाता है तो कही "अमूल बेबी" कहने पर "हंगामा" मच जाता हैं ! यही नहीं "हम"समय से टैक्स देंगे, "रिश्वत" ना देंगे ,ना लेंगे...सोचते ही "आत्मा" कांप जाती है और भरी ट्रेन से "महिला खिलाडी"को धक्का देकर  उसका "पैर" छीन लेने वाले "पकडे" नहीं जाते है, हमें इस पर "मलाल"नहीं होता  बल्कि "हम" उसके "नौकरी मिलने","नकली पैर दिए जाएँ" की "ख़बरें" "देख-पढ़" कर "संतुष्ट" हो जाते है ! जाने दीजिये भाई साब,बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी ..."चेतन आनंद" की "हकीक़त" भले "रंगीन" हो रही हो लेकिन अपनी "हकीक़त" "विधेयक" बनने से रंगीन नहीं होगी बल्कि अपने "अन्दर" के "अन्ना"को "जगाने" से होगी! "मै" भी "आप" जैसा ही हूँ! "फुर्सत"से बैठा हूँ इसलिए "बता" दे रहा हूँ कि अभी-अभी एक "शेर" पढ़ा है इसलिए "कह" पा रहा हूँ ! आप भी "पढ़िए"  और हो सके तो "कुछ"करिए..."हो रही है "जिस्म" में "जुम्बिश" देखिये,इस "परकटे" "परिंदे" कि "कोशिश" तो देखिये !!!!!!!!    

Sunday, April 10, 2011

"सिंगल" से "हजारे" "हजारे" से "लाखो" "करोडो" .....

वो क्या है भाई साब,हम तो ठहरे "खाने-खिलाने"वाले आम आदमी ,सारी उम्र इसी कोशिश में लगे रहे कि "उपवास" न करना पड़े,कभी "नीबूं पानी" पिया भी तो "टेस्ट" बदलने के लिए...मगर "जंतर मंतर" पर इस बार तो ऐसा "नीबूं पानी"पिया कि वाकई सारा "टेस्ट" ही बदलता दीख रहा है!मामला "सिंगल" से "हजारे" और फिर "हजारे"से "करोडो"हो गया है और कमाल कि बात ये है कि ये वही "करोडो" है जिन्होंने खुद "वोट"देकर  "भ्रष्टाचारियो" को  ही भेजा है और आज "खुद"  "भ्रष्टाचार" के खिलाफ खड़े हो गए है ! वाह रे मुल्क,समझ में नहीं आता कि "मुहं" पर "दुपट्टा" "धूप" से बचने के लिए लपेटा है या "बाइक" की "पिछली सीट" पर "बैठने" के लिए.....आपकी कसम,"वानखेड़े" में जीते गए "कप" और "जंतर मंतर" पर लहराते "गठन के आदेश"को देख कर फ़ौरन "सरकारी अफसर" का "बयान" याद आ गया...असली "ट्राफी" तो हमारे पास है...बोले तो,अब मामला "सड़क"से उठकर " "फाईलो" और "बाबुओं" तक पहुँच गया है ! आओ अब उतारो "गद्दाफी"को "गद्दी" से! 90और 92 में भी ऐसा ही माहौल था !आज कोई "चर्चा" भी नहीं करता है!आप भी हर बार "उपवास" नहीं रख सकते,पता है ना अब तो "नवरात्री"में "कुट्टू" का आता भी "सुरक्षित" नहीं है!याद आती है पंक्तियाँ ,जो "पाप" कहता है (शायद भारत भूषण जी की है ) जन्म लेता ना मै धरा पर,तो ये धरा बनी मसान होती! ना मंदिरों में मृदंग बजते, ना मस्जिदों में अजान होती!!"गांधी" ने अंग्रेजो" को भगाया,"जय प्रकाश" की वजह से "आपातकाल" लगा अब "अन्ना" ने "जन लोकपाल विधेयक" के लिए ललकारा है 
यानि आई .पी. एल की ज़बान में कहें तो हर "ट्वेंटी" दशक के बाद "भ्रष्टाचार"के खिलाफ हमें "स्ट्रेटजिक टाइम आउट "लेना पड़ रहा है वो भी हर बार एक नए "कोच" के साथ और "भ्रष्टाचार" है की "चौके-छक्के" लगाये जा रहा है और हम "भ्रस्टाचार" को देख कर गा रहे है "रज़िया फंस  गयी गुंडों" में उधर "भ्रष्टाचार" "रज़िया"की तरह "आईटम गर्ल"बनकर "जीवन" की "आपधापी" से "पीड़ित" जनमानस को "एंटरटेन"  कर रहा है...जनता हूँ भाई साब,आँखें बंद कर लेने से सिर्फ "अँधेरा" होता है!"सूरज" नहीं "डूब" जाता है !जो "रौशनी" चमकी है उससे देखने का "वक़्त" आ गया है!अब हमें "आँखे" खोलनी  ही होगी !"राम नवमी" आ  गयी है!"भ्रष्टाचार" के विरुद्ध "जन जागरण " और "अयोध्या"में "प्रभु" का "अवतरण" अकारण नहीं है...ये "शुभ" संकेत है...गोस्वामी जी ने कहा भी है "जब जब होए धरम की हानी,बाढें असुर अधम अभिमानी!तब तब  धरी प्रभु मनुज सरीरा ,हरहि भव  सज्जन पीरा  !!".आमीन !!!!!!!!!!!!!!!!         
          

Sunday, April 3, 2011

.....जियो खिलाडी वाह रे वाह !!!!!!

तोभाईसाब,फाईनलीहम"वर्ल्डचैम्पियन"बन  ही गए ! सच बताऊँ  तो "आधी रात" तक "जीत" का "जश्न" मनाने के बाद अब फुर्सत से बैठा
तो याद आया कि जीत का"जश्न"मनाने वालों में "वो" भी शामिल थे जो "ज़हीर"
के आखिरी पांच ओवर "पिटने" पर "गरिया"रहे थे!"वो" भी थे जिन्होंने "सचिन" और "सहवाग" के आउट होने के बाद ही "हार"का "एलान" कर दिया था ! "वो"  भी थे जो "श्रीशांत" के "ना खिलाने" पर और "वो"भी जो "खिलाने"पर सवाल खड़े कर रहे थे......कसम "मुरलीधरन"कि दिमाग ही घूम गया ! "कन्फयूजन" इतना  कि "मन" किया "दोबारा" "टास" करा लूँ ! बहरहाल वो तो  भला हो "रेफरल सिस्टम" का जो  दिमाग से "कंसल्ट"  किया तो "साइमन टफेल"कि तरह "निर्णय"बदलना पड़ा और "जीत" कि "वज़ह "समझ में आ गयी वर्ना टी.वी.स्क्रीन के "विशेषज्ञों"कि तरह कभी "टार्गेट" तो कभी "पिच"को तो कभी "रणनीति"को "कोसता" रहता और जीतने पर "जश्न" मनाने का सारा "क्रेडिट" खुद ले लेता!एनी वे,"आपको" लगता रहे कि जीत "राम-रावन" से लेकर"रजनीकांत" वाले "मैसेज" को "फारवर्ड"
 करने से मिली है लेकिन  आपसे एक "प्राईवेट" जानकारी "शेयर" करता हूँ किसी से "कहियेगा" नहीं,कसम "गिलानी" की,सच तो ये है कि जैसे ही "महेंद्र राजपक्षे"ने अपना "निमंत्रण" स्वीकार किया ,अपनी "जीत" तय हो गयी थी!क्योंकि ये वो "मुल्क" है जो "टोटके" भी मानता है और "भावनाओं"  में  बहता भी है मगर भाई साब  "जिंदगी"के "वर्ल्ड कप"में न तो "टोटके" चलते है और न ही "भावनाएं"! यहाँ  "महेला"की "पुरुषोचित पारी" भी "हार" को नहीं "टाल" पाती है और "गंभीर" का एक "लापरवाही" भरा शाट "शतक" नहीं बनने देता ! जीत का "जश्न"ज़रूरी है मगर  "उन्माद" खतरनाक !"खबरिया मीडिया" ने "मोहब्बत"बिखेरने वाले "खेल" को "जंग"में तब्दील कर दिया है!  माना "जीत" के लिए "किलर इंस्टिंक्ट"ज़रूरी है मगर "खेल भावना" को "किल" करके नहीं !यहाँ "हारने" वाला भी "दिल" जीत लेता है!हमें  "इडन गार्डेन"में रोते हुए "काम्बली"का चेहरा याद है!हमें "शारजाह"में पड़ा "छक्का" याद है!हमें "लार्ड्स" की "बालकनी" में"कप"उठाये  "कपिल" याद है और अब हमें "वानखेड़े"में लगे "छक्के" के बाद "कप"उठाये "धोनी & टीम"याद रहेगी......सच मानिये "जाते-जाते" ये "विश्व कप"हमें बहुत कुछ दे गया है!हमें याद रहेगा "आफरीदी" का बयान,जो "अपने" "मुल्क" में लौटने पर दिया है ..."हम हार गए है!मै इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ!मगर भारतीयों से इतनी नफरत क्यों?वो भी "हम" जैसे ही है....जियो "खिलाडी" "वाह रे वाह"!!!!!!!
भाई साब,अगर यही "विश्व कप" "मुकाबला"है तो इसे होते रहना चाहिए क्योकि यहाँ "जीत" "राम-रावन"की नहीं!"गोरों", "-....खोरो", और सीता माँ के ".......", की नहीं,यहाँ "जीत" "खेल"की होती है...कभी "फुर्सत"में  "दिल" से सोचियेगा !"जवाब" यही मिलेगा !!....भारतीय "जीत" की 'मंगलकामनाओं" के साथ अर्ज है "जागते रहिये ज़माने को जागते रहिये,मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलते रहिये!प्यार हो जायेगा आपको भी एक दिन, दिल मिले न मिले, नजरो से नज़रें मिलते रहिये!!!!!!!